आयुर्वेद का अर्थ औषधि - विज्ञान नही है वरन आयुर्विज्ञान अर्थात '' जीवन-का-विज्ञान'' है

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गुरुवार, 17 दिसंबर 2009

सर्दी से बचाव

 इन आलेखों में पूर्व विद्वानों द्वारा बताये गये ज्ञान को समेट कर आपके समक्ष सरल भाषा में प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयत्न मात्र है .औषध प्रयोग से पूर्व किसी मान्यताप्राप्त हकीम या  से सलाह लेना आपके हित में उचित होगा

हमारे बुजुर्ग तो सर्दी से बचने के लिए सुबह से शाम तक नसीहतें देते रहते हैं ,और हम उनमें से एक भी नहीं मानते हैं ,कभी चिढ के कारण तो कभी फैशन के कारण .
चलिए मैं ऐसा उपाय बताती हूँ जो सरल भी है जिसे करने में शायद आपको कष्ट भी न हो -----अजवाईन सबके घरों में होती है ,न हो तो किसी भी दूकान से मिल जायेगी .  बस दो चाय का चम्मच भर के अजवाईन लीजिये और बिना चबाये पानी से निगल जाइए , महिलायें सप्ताह में तीन दिन और पुरुष सप्ताह में चार दिन ये सुबह खाली पेट ले सकते हैं ,अगर बच्चों को देना चाहते हैं तो डेढ़ चाय का चम्मच लीजिएगा  . तीन ग्राम बच्चों को तथा पांच ग्राम वयस्कों को लेनी चाहिए . बुजुर्गों को भी यही मात्रा दी जा सकती है .
इसके फायदे देखिये------
जाड़े में जो हम ज्यादा खाना खा लेते हैं वो ठीक से शरीर द्वारा अवशोषित हो जाएगा ,कफ जमने से जो सांस लेने में तकलीफ होती है वह ख़त्म हो जायेगी ,सांस यूं ही सहज और सरल रहेगी जैसे सामान्य दिनों में रहती है , शरीर को पर्याप्त गरमी स्वतः मिलती रहेगी ,  पुराने उभरने वाले जोड़ों या चोटों के दर्द परेशान नहीं करेंगे , नजला नहीं होगा ,  खांसी की भी संभावना ख़त्म
और भी सर्दी से होने वाली तमाम परेशानियों से आपको मुक्ति मिल जायेगी
अब शौक से आप बिना दस स्वेटर लादे कहीं भी जा सकते हैं , आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक का भी यदा-कदा लुत्फ़ उठा सकते हैं
अगर कोई दिक्कत इसके बाद भी महसूस होती है तो एक और छोटा सा उपाय ---
पानी khuub  garam  kijiye  kareeb  दो liitar  ,usmen  एक चम्मच namak daaliye ,fir usii में apne dono pair daal kar 10 minat baithh  jaaiiye , saarii samasyaa  ख़त्म
और कोई pareshaanii हो तो fir  mujhe  fon  kar  लीजिये