आयुर्वेद का अर्थ औषधि - विज्ञान नही है वरन आयुर्विज्ञान अर्थात '' जीवन-का-विज्ञान'' है

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सोमवार, 18 अप्रैल 2011

गाजर



यह लेख कादम्बिनी के फरवरी २०११ के अंक में प्रकाशित हो चुका है 


गाजर ये तो खरगोश की पहली पसंद है. लेकिन आज से आप सभी इसे अपनी ख़ास पसंद में शामिल कीजिए. आपने कभी गाजर का मुरब्बा खाया है वो भी शहद में बना हुआ. अद्भुत और अपूर्व शक्ति देता है ये.छः महीने तक बादाम घी खाकर आप जितनी ताकत  अर्जित करेंगे उतनी सिर्फ २ किलो शहद वाला गाजर का मुरब्बा खाने से मिल जायेगी. इस गाजर में विटामिन ए,बी,और सी तो पाए ही जाते हैं साथ में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, वसा, कार्बोहाईड्रेट, थायमीन, रीबोफ्लेविन,निकोटेनिक एसिड, रेशे आदि महत्वपूर्ण तत्व भी मौजूद हैं इसमें.


इसका प्रयोग मुंह से बदबू का आना, बवासीर, बदन दर्द, हृदय  रोग, तिल्ली बढ़ना,दमा, हिचकी, हैजा, सड़े हुए घाव को ठीक करने में ,आसानी से प्रसव कराने में,आखों, दस्त, कीड़े मारने और किडनी को मजबूत करने के लिए होता है.

आप खुद सोचिये कि ये अमृत है या नहीं.

** गाजर की सब्जी आपने कभी नहीं खायी होगी जबकि ये आपकी किडनी के लिए अमृत का काम करती है. सामान्य तरीके से हल्दी नमक मसाले आलू या कोई भी और सब्जी मिक्स करके आप इसे बना सकते हैं. ये सब्जी बदन में कहीं भी दर्द हो तो उसे ठीक कर देगी. अगर खूनी बवासीर हो तो केवल गाजर की सब्जी को ऊपर से मक्खन या दही मिला कर १० दिन खा लीजिये.

** अगर दस्त हो रही हो तो गाजर का रस पिलायें.

** प्रसूता नारी को बिना दर्द के आराम से प्रसव हो जाए इसके लिए आप गाजर के पत्तों का काढा बना कर उसे पिला दीजिये.

** जो घाव किसी भी दवा से न भर रहा हो उस घाव में गाजर उबाल कर मसल कर भर दीजिये. आप घाव को ३ दिनों में ही भरते हुए देखेंगे सिर्फ मनुष्यों के घाव ही नहीं ,जानवरों के भी. आजमा कर देखिये.


** हैजा में गाजर उबाल कर वह पानी थोड़ा ठंडा करके पिलायें ,कम से कम ५ बार.१ बार में  १०० ग्राम पिला सकते हैं.


** पेट के कीड़े मारने के लिए तो बस कच्ची गाजरे खाते जाएं.


** अगर शरीर में कहीं खून जम गया हो तो गाजर और गाजर के पत्ते ज़रा सा आग पर पका कर क्रीम बना लीजिये और उस स्थान पर लेप कर दीजिये. दो बार में ही खून का थक्का गायब.


** तिल्ली को स्वस्थ रखने के लिए गाजर का अचार खाएं 


** गाजर का मुरब्बा हृदय को भी मजबूत कर देता है.


निष्कर्ष ये कि गाजर जैसे भी खायी जाए ये किसी न किसी बीमारी को ख़त्म कर ही देती है. तो तय कीजिए कि वर्ष भर तो संभव नहीं फिर पूरे मौसम ही आप गाजर की सब्जी ,हलुवा, मुरब्बा, या  रस या काढा या फिर कच्ची ही खाते-पीते रहेंगे. ताकि किडनी, हृदय, तिल्ली सब मजबूत हो जाए और हर दशा में गाजर आँखों की रोशनी तो बढाती ही है.




  अब पता लगा आपको कि खरगोश क्यों गाजरें खाता है !!!!!!!!!





इन आलेखों में पूर्व विद्वानों द्वारा बताये गये ज्ञान को समेट कर आपके समक्ष सरल भाषा में प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयत्न मात्र है .औषध प्रयोग से पूर्व किसी मान्यताप्राप्त हकीम या वैद्य से सलाह लेना आपके हित में उचित होगा

रविवार, 27 मार्च 2011

आंवला

काले तिल की पोस्ट में एक आदरणीय पाठक महोदय ने आंवला के बारे में जानना चाहा था ,इसलिए ये लेख मैं आपके सम्मुख रख रही हूँ .यह लेख  प्रतिष्ठित पत्रिका कादम्बिनी में दिसंबर २०१० के अंक में प्रकाशित हो चुका है 


आंवला हमारी नस नस में  समाया हुआ फल है. हर खासो-आम  इसका मुरीद है, लड़कियों के बाल धुलने से लेकर दादी नानी के चटपटे हाज़मा चूर्ण तक में इसकी गहरी पैठ है. बुजुर्ग लोग आज भी कार्तिक का महीना आते ही आंवले का पेड़ खोजने लगते हैं ताकि दिन भर उसी के नीचे बैठकी जमे. बहुत शुभ और गुणकारी माना जाता है कार्तिक के महीने में आंवले का सेवन. इसके पेड़ की छाया तक में एंटीवायरस गुण हैं और गज़ब की जीवनी शक्ति है. कार्तिक के महीने में इस पेड़ के ये दोनों गुण चरम पर होते हैं, अगर आप श्वास की किसी भी बीमारी से परेशान है तो सिर्फ इसके पेड़ के नीचे खड़े होकर ५ मिनट गहरी गहरी श्वासें लीजिये,१०-१५ दिन में ही बीमारी आपका पीछा छोड़ देगी.


इसे अमर फल भी कहते हैं.कहीं कहीं धात्रीफल और आदिफल के नाम से भी जानते हैं . इसका वैज्ञानिक नाम है-एम्ब्लिका आफीसिनेलिस.  इस आमले/आंवले के फल और बीज दोनों ही उपयोगी हैं. इसके फल में प्रोटीन,कर्बोहाईड्रेट , रेशा, वसा,विटामिन-सी,विटामिन बी-१,एस्कार्बिक एसिड , निकोटेनिक एसिड, टैनिन्स, ग्लूकोज, फ्लेविन, गेलिक एसिड और इलैजिक एसिड पाए जाते हैं.इसके बीजों में आलिक एसिड लिनोलिक एसिड और लिनोलेनिक एसिड पाए जाते हैं.
ये एक आंवला हजार बीमारियों को भगाता है, लेकिन वहीँ आंवले का मुरब्बा अगर चूने के पानी में उबाल कर बनाया गया है तो सिर्फ सुस्वादु ही हो सकता है, गुणकारी नहीं . इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि हरा आंवला ही ज्यादा प्रयोग किया जाए. ये चार महीने बाजार में उपलब्ध रहता है. अगर हम चार महीने इसका सेवन कर लें तो शेष आठ महीने तक तो रोग रहित होकर जीवनयापन कर ही सकते हैं.
इसके सेवन का बिलकुल सामान्य और आयुर्वेदिक तरीका कुछ यूं है--

--- आप १ किलोग्राम हरा आंवला लीजिये साथ ही २०० ग्राम हरी मिर्च. दोनों को धो लीजिये .आंवले को काट कर गुठलियाँ   बाहर निकाल दीजिये, अब दोनों को ग्राईडर में  दरदरा पीस लीजिये (बिना पानी डाले).अब इसमें १०० ग्राम सेंधा नमक मिला दीजिये . इसे परिवार का प्रत्येक सदस्य चटपटी चटनी की तरह मजे से खायेगा .इसी को आप धूप में सुखा कर पूरे वर्ष के लिए सुरक्षित भी रख सकते हैं.जब इच्छा हो दाल या सब्जी में ऊपर से डाल कर खा सकते हैं. हरी मिर्च  (कच्ची) हीमोग्लोविन बढाती है और आंवले के साथ उसका मिश्रण सोने में सुहागा हो जाता है. इसका प्रयोग शरीर में एक्टिवनेस  को तो २४ घंटे में ही बढ़ा देता है अनगिनत लाभ हैं इससे .लीवर मजबूत  हो  जाता  है.  

ल्यूकोरिया के लिए 
आंवले के बीजों का पावडर बना लीजिये. एक चम्मच पावडर में आधा चम्मच शहद और थोड़ी सी मिश्री मिला कर सवेरे खाली पेट खाएं. १५ दिनों तक

बुढापा दूर करने के लिए
१०० ग्राम आंवले का पावडर और १०० ग्राम काले तिल का पावडर मिलाये. अब इसमें ५० ग्राम शहद और १०० ग्राम देसी घी मिलाएं . एक चम्मच प्रतिदिन सुबह सिर्फ एक महीने तक खाना है 

ज्वर दूर करने के लि
दो चम्मच हरे आंवले का रस और दो ही चम्मच अदरक का रस मिश्री मिलाकर दिन में दो बार . बस 

मूत्र त्याग में दर्द के लिए 
१५० ग्राम आंवले का रस लीजिये ,बिना कुछ मिलाये पी जाएं , बस दो दिनों तक

खांसी में
सूखे आंवले के एक चम्मच पावडर में थोड़ा घी मिला कर पेस्ट बना लीजिये, दिन में दो बार चाटिये 

सुगर के मरीजों के लिए
आंवला और हल्दी का पावडर बराबर मात्रा में लीजिये ,अच्छी तरह मिक्स कीजिए.जितनी बार भी भोजन करें उसके बाद एक चम्मच पावडर पानी से निगल लीजिये.सुगर कभी परेशान नहीं करेगी

हकलाहट हो तो
१०० ग्राम गाय के दूध में एक चम्मच सूखे आंवले का पावडर मिला कर लगातार १५ दिन पीयें, आवाज बराबर से निकलेगी और कंठ सुरीला भी होगा 

छाती(सीने) में जलन के लि
सूखे आंवले का एक चम्मच पावडर शहद मिला कर सुबह चाटिये 
या
एक चम्मच पावडर में दो चम्मच चीनी और दो ही चम्मच घी मिलाकर चाटिये.

पीलिया(जांडिस) में
एक गिलास गन्ने के रस में तीन बड़े चम्मच हरे आंवले का रस और तीन ही चम्मच शहद मिला कर दिन में दो बार पिलाए. १० दिन तक पिलाना बेहतर रहेगा जबकि रोग तो तीन दिन में ही ख़त्म हो जाएगा
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इन आलेखों में पूर्व विद्वानों द्वारा बताये गये ज्ञान को समेट कर आपके समक्ष सरल भाषा में प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयत्न मात्र है .औषध प्रयोग से पूर्व किसी मान्यताप्राप्त हकीम या वैद्य से सलाह लेना आपके हित में उचित होगा